Author Topic: खत लिखके प्रेम का मैं खताकार हो गया  (Read 35 times)

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Susheel Bharti

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बहर 2212121 1221212

खत लिखके प्रेम का मैं खताकार हो गया।
कागज़ पे खून देख मेरा यार रो गया।

खत पर जो दिल के ज़ख्म उभर आए थे कभी,
हर ज़ख्म उनके दिल में बहुत दर्द बो गया।

मेरे जिगर के खून ने दी कांटों सी खलिश,
हर लफ्ज़ दिल का खून से पलकें भिगो गया।

दिल पिघला यार पूरा थी स्याही में वो चमक,
अश्कों से मेरा यार वो कागज़ ही धो गया।

उस प्रेम पत्र के दर्द में डूबा वो यार यूँ,
मानो चकोर चाँद की अलफत में खो गया।

लांघी कलम ने दर्द की सरहदें तमाम जब,
तब दर्द से कराहते वो यार सो गया।

मेरा गुनाह था की हदें पार ईश्क में,
जब खून में कलम था लगा वक्त वो गया।

रचनाकार-- सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू, (हि.प्र.)   

Fikr

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bhayee bahut khoob bahut acha lagaa... ki kaafi ya bahut sudhaar aayaa hai... ab lag raha hai ki nayee shuruaat ki hai aur achi shuraat

Sagar

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  • Be melting snow~ Rumi
लांघी कलम ने दर्द की सरहदें तमाम जब,  is misre ke liye khaas daad
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

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  • Hum se khafa zamaana to Hum bhi jamaane se khafa
बहर 2212121 1221212

खत लिखके प्रेम का मैं खताकार हो गया।
कागज़ पे खून देख मेरा यार रो गया।

खत पर जो दिल के ज़ख्म उभर आए थे कभी,
हर ज़ख्म उनके दिल में बहुत दर्द बो गया।

मेरे जिगर के खून ने दी कांटों सी खलिश,
हर लफ्ज़ दिल का खून से पलकें भिगो गया।

दिल पिघला यार पूरा थी स्याही में वो चमक,
अश्कों से मेरा यार वो कागज़ ही धो गया।

उस प्रेम पत्र के दर्द में डूबा वो यार यूँ,
मानो चकोर चाँद की अलफत में खो गया।

लांघी कलम ने दर्द की सरहदें तमाम जब,
तब दर्द से कराहते वो यार सो गया।

मेरा गुनाह था की हदें पार ईश्क में,
जब खून में कलम था लगा वक्त वो गया।

रचनाकार-- सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू, (हि.प्र.)   
waah sushil ji  nikhaar aa raha hai dheere dheere aap ki lekhni meiN ..bahut din baad yahaN hazri lagaai aapne
ummid hai aap ko niymat yahaN padeinge  ...bahut khoob ..or achha achha  likhte rahiye :)
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Musaahib

  • Hindvi
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Waah Waah Waah Susheel jee bahut acchhi ghazal huii hai, dheroN daad qubool kareN..