Author Topic: मिल जाए गरीबों को अगर.....  (Read 67 times)

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Susheel Bharti

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मिल जाए गरीबों को अगर.....
« on: March 02, 2015, 01:08:10 PM »
मिल जाए गरीबों को अगर.....

मिल जाए गरीबों को गर दो वक्त की रोटी,
अमीरों को बात ये हज़्म नहीं होती।

ज़माने के दर्द में पिघल जाता है दिल गरीबों का,
अमीरों की आँख तक नहीं रोती।

गरीबों का कभी चूल्हा तक नहीं जलता,
देखकर इनकी तरक्की अमीरों की रूह है जलती।

दिख जाए गरीबों की झोली में दो पैसे ज्यादा गर,
तो अमीरों को यह बात है चुभती।

बेबसों के घर आग लगाने में अमीर होते हैं माहिर,
और गरीबों के पेट की आग तक नहीं बुझती।

ढोल अक्सर बनाए जाते हैं बजाने के लिए,
’भारती’ मुफलिसों की यहाँ कुछ नहीं चलती।

सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू