Author Topic: ‘ईश्क करना अगर सज़ा होता’  (Read 8 times)

0 Members and 1 Guest are viewing this topic.

Susheel Bharti

  • Newbie
  • *
  • Posts: 22
‘ईश्क करना अगर सज़ा होता’
Bahar…212 212 1222
रचनाकार— सुशील भारती

ईश्क करना अगर सज़ा होता,
आदमी कर रहा दुआ होता।

हुस्न तूने बना लिया मौला,
दिल न इंसान को दिया होता।

होता इंसान पिंजरे का पंछी,
कैद में घुट के मर रहा होता।

खौफ रहता बड़ा ज़माने से,
तब तो हर शख्स हाँ खफा होता।

बस महक को तरसते सब भंवरे,
एक भी गुल अगर फना होता।

नफरती अग्न में जहाँ जलता,
प्यार का दीप गर बुझा होता।

आब की जगह खून गर मिलता,
प्यासे को हे खुदा गिला होता।

ईश्क करना अगर सज़ा होता,
आदमी कर रहा दुआ होता।

A Gazal created by... Susheel Bharti  सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू, (हि.प्र.)