Author Topic: नहीं तू भी कोई अजंता की मूरत ,  (Read 63 times)

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vsm1978

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इस्लाह  का स्वागत है , मैंने कई जगह मात्रएं गिराई है क्या वो सही है

122    122     122    122

नहीं तू भी कोई अजंता की मूरत ,
अपना भी दिल आशिक़ाना नहीं है !

 तू मौत के फ़लसफा में है उलझा ,
यहाँ ज़िन्दगी का ठिकाना नहीं है !

निग़ाहों में तेरी हैं अपने - पराए ,
अपने लिए कोई बेगाना नहीं है !

जमाना से तेरी है हस्ती ए नादाँ !
*क्या तू जो नहीं ; तो जमाना नहीं है ?

वज़ह लाज़िमी ज़िदगी को है कोई ,
पर मौत का कोई बहाना नहीं है !

सियाशत कहें जिसको , है वो तमाशा ,
जिस फ़न में कोई सयाना नहीं है !

कोई सच को लिख के भी भूखा न सोये !
विजय ये !  वो अब जमाना नहीं है !

Vijay Shanker Mishra

Sahil

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waah bahut khoob

Fikr

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इस्लाह  का स्वागत है , मैंने कई जगह मात्रएं गिराई है क्या वो सही है

122    122     122    122

नहीं तू भी कोई अजंता की मूरत ,
अपना भी दिल आशिक़ाना नहीं है !
अपना  2/2 ya 2/1 hoga
behr se out ho gaya
yun dekho

dil apna bhi to aashiqana nahi hai

di-lap--naa.... aise ayega..

 तू मौत के फ़लसफा में है उलझा ,
behr se out

tu kyun mout k falsafe main hai uljhaa
यहाँ ज़िन्दगी का ठिकाना नहीं है !

निग़ाहों में तेरी हैं अपने - पराए ,
अपने लिए कोई बेगाना नहीं है !

begaana..... out ho jayega qaafiya
22X
be nahi girega...
qaafiya doosra lao

जमाना से तेरी है हस्ती ए नादाँ !
*क्या तू जो नहीं ; तो जमाना नहीं है ?
kya.... nahi girega bhayee...

aise karo misra
agar tu nahi to zamana nahi hai
pahla misra bahut ultaa hai..

वज़ह लाज़िमी ज़िदगी को है कोई ,
पर मौत का कोई बहाना नहीं है !

wajah... 21 hoga fir bhi chal jayega....
पर मौत का कोई बहाना नहीं है !
khariz.....
magar mout tera bahana nahi hai

सियाशत कहें जिसको , है वो तमाशा ,
जिस फ़न में कोई सयाना नहीं है !

doosr misra out....

yun kar lo hai bhola bahut jo sayanaa nahi hai

कोई सच को लिख के भी भूखा न सोये !
विजय ये !  वो अब जमाना नहीं है !

second fir out jhol hai

vijaye ye puranaa zamana nahi hai


aur aapne wazn jahan b giraya laga bahut ghalat giraya hai
har doosre misre k shuru main gadbad lagi
jaldi main dekha hai.... sat sunday.... karta hun achy se theek abhi inpe nazar daalo...

jahan jahan koshish ki hai wazn giranee ki bata dena...
« Last Edit: January 21, 2015, 11:43:50 AM by Fikr »

vsm1978

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Vikas Bhai ab dekhna -  :) :)


मुझे अब किसी को मनाना नहीं है,
ग़मे दिल किसी को बताना नहीं है !

निग़ाहों में तेरी हैं अपने - पराए ,
मगर हमने अब ग़ैर माना नहीं है .

नहीं तू भी कोई अजंता की मूरत ,
ये दिल अपना भी आशिक़ाना नहीं है !

तू उलझा है क्यूँ मौत के फलसफे में .
यहाँ ज़िन्दगी का ठिकाना नहीं है !

कलम ही नहीं साथ ख़ंज़र भी रक्खो
यहाँ दोस्तों का ठिकाना नहीं है !

जमाने से तेरी है हस्ती ए नादाँ !
नहीं तू तो क्या ये जमाना नहीं है ?

सबब ज़िन्दगी के लिए है ज़रूरी .
मगर मौत को अब बहाना नहीं है .

सियास त कहें जिसको , है वो तमाशा ,
कि इस फन में कोई सयाना नहीं है !

लिखे जो हक़ीक़त वो भूखा न सोये .
"विजय" पहले सा अब ज़माना नहीं है

विजय शंकर "मिश्रा".

Fikr

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bhayee ek hi ghazal kitni baar dekhun :(

wazn girane ka masaalaa  tha wo bataate to clear karta :(

pahle wale zyda behtar thy... is baar to bas... seedha sapaat likh diya hai... behr mian fir karne ko... behr fir b gadbad hai
« Last Edit: January 27, 2015, 07:20:26 AM by Fikr »