Author Topic: कुछ पल जी लूँगा बाकी गम को सहता हूँ  (Read 41 times)

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vsm1978

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तुम आते हो तो मैं फिर जीने लगता हूँ
तुमसे ही मेरी खुशियाँ हैं ये कहता हूँ

जीता था पहले भी पर इतना खुश कब था
पल पल सावन में साज हवा सा बहता हूँ

तुम अब जीने की चाहत आ साथ चले हम 
बहकी बहकी तुम  मैं छाया बन चलता हूँ


तू  है  तेरी  यादें  फिर  कैसी  तन्हाई
तू मेरे दिल में मैं तेरे दिल में रहता हूँ

आते हो दिल की धड़कन बन, आते रहना
कुछ पल जी लूँगा बाकी गम को सहता हूँ

Vijay Shanker Mishra

Rashmi

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तुम आते हो तो मैं फिर जीने लगता हूँ
तुमसे ही मेरी खुशियाँ हैं ये कहता हूँ
waaah ji ...tum aate ho to main phir jeene lagta hoon ...dil ko choo gaya ye misra
जीता था पहले भी पर इतना खुश कब था
पल पल सावन में साज हवा सा बहता हूँ
ismein bhi pahla misra bahut pasand aaya...doosra kuchh samajh ni aaya.  ....saaj..? ...
तुम अब जीने की चाहत आ साथ चले हम 
बहकी बहकी तुम  मैं छाया बन चलता हूँ
khoob

तू  है  तेरी  यादें  फिर  कैसी  तन्हाई
तू मेरे दिल में मैं तेरे दिल में रहता हूँ
yahan 2nd misra wazan se out hai aisa mujhe lagta hai.... baaki experts bataeinge :)
आते हो दिल की धड़कन बन, आते रहना
कुछ पल जी लूँगा बाकी गम को सहता हूँ
waaah khoob kaha
Vijay Shanker Mishra
kaafi achha paryaas hai vijay ji.... har sher ka pahla misra to bahut hi achha laga ...likhte rahiye..or achha or achha .... gudluck ji
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale