Author Topic: naakam hasrteiN  (Read 26 times)

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Rashmi

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naakam hasrteiN
« on: December 13, 2014, 11:48:43 AM »
दाग दामन पे.. कैसे छुपाऊँगी मैं
अश्क आँखों से कितने बहाऊँगी मैं
212-212-212-212

सर उठा के ही जीना सिखाती थी माँ
तेरे सजदे में बस सर झुकाऊंगी मैं

हाथ तेरे ही है डोर किस्मत की तो
खींच इतना भी मत टूट जाऊँगी मैं

चश्मे तर कतरा ख़ूं जो छुपा पाती हों
रात भर वो ही शबनम लुटाऊंगी मैं

सिलसिला ये ही चलता रहा ..चलती चल
रुक गई गर जो तू ..रुक न पाउंगी मैं

रश्मि बैठी हो नाकाम हसरत के बल
छोड़ भी दो ये जिद्द रूठ जाऊँगी मैं
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Fikr

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Re: naakam hasrteiN
« Reply #1 on: December 15, 2014, 02:27:47 AM »
सिलसिला ये ही चलता रहा ..चलती चल
रुक गई गर जो तू ..रुक न पाउंगी मैं


Bahut umda ji
Chaliye chalte rahiye

Sagar

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Re: naakam hasrteiN
« Reply #2 on: May 08, 2015, 06:40:50 PM »
हाथ तेरे ही है डोर किस्मत की तो
खींच इतना भी मत टूट जाऊँगी मैं

waah kya kehne.. waah
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ