Author Topic: हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे ....  (Read 96 times)

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Musaahib

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जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

यूँ तो कहते थे "मुसाहिब" आज से पहले भी पर
आप से मिलकर ग़ज़ल में हम असर रखने लगे

हजर - Stone

‪#‎Musaahib‬ (‪#‎मुसाहिब‬)

Muditras

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Mujhe hairani hai ye sabki nazar se kaise bach gayi. Bahut ghazab ki ghazal huyi hai ye vishwajeet... Ek ek sher qatl hai iska... Khaskar chautha sher.

Rashmi

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  • Hum se khafa zamaana to Hum bhi jamaane se khafa
जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

यूँ तो कहते थे "मुसाहिब" आज से पहले भी पर
आप से मिलकर ग़ज़ल में हम असर रखने लगे

हजर - Stone

‪#‎Musaahib‬ (‪#‎मुसाहिब‬)
bahut khoob ........sach meiN pata ni kaise nazar se bach gai ye ghazal ......nazar ni lagwana chahti hogi na  :p
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Musaahib

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Mujhe hairani hai ye sabki nazar se kaise bach gayi. Bahut ghazab ki ghazal huyi hai ye vishwajeet... Ek ek sher qatl hai iska... Khaskar chautha sher.

Koi baat nahi Mudita Jee , main to bhool hi gaya tha ki maine ye ghazal post bhi ki hai.. :P
shukriyaa hauslaafazaaii ka..

Musaahib

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जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

यूँ तो कहते थे "मुसाहिब" आज से पहले भी पर
आप से मिलकर ग़ज़ल में हम असर रखने लगे

हजर - Stone

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bahut khoob ........sach meiN pata ni kaise nazar se bach gai ye ghazal ......nazar ni lagwana chahti hogi na  :p

Nahi Amma aisa nahi ho sakta ki aapki nazar lage....aapke aashirwaad se hi to likhta hu...:)

Rashmi

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जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

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bahut khoob ........sach meiN pata ni kaise nazar se bach gai ye ghazal ......nazar ni lagwana chahti hogi na  :p

Nahi Amma aisa nahi ho sakta ki aapki nazar lage....aapke aashirwaad se hi to likhta hu...:)
god bless my child... or tez ho aapki kalam ki dhaar
Rashmi Sharma

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Sagar

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  • Be melting snow~ Rumi
Khoovsoorat ghazal   ....
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

vsm1978

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Bahut Khub , Bahut Khub :) :) :) :)

Fikr

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जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

यूँ तो कहते थे "मुसाहिब" आज से पहले भी पर
आप से मिलकर ग़ज़ल में हम असर रखने लगे

हजर - Stone

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Pahle to janaab chand sa humsafar pane ki mubarakbaad...
Aur naye safar ki bhi..
तुझको तेरा हमसफ़र इतना मुबारक यार कि
तुझको मुझसे दूर होने का भी कोई ग़म न हो :)

Aur apni to jeb hi fati hai kagaz tikta nahi pathar to door ki baat hai.....

Susheel Bharti

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Susheel Bharti

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Wah......bahut khoob likha hai aapne........

Musaahib

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जब से हम भी चाँद सा एक हमसफ़र रखने लगे
हाल का मेरे ख़ुदा भी अब ख़बर रखने लगे

टूट जाने की तेरे इन हादसों से हारकर
हम भी अपने दिल के गोशे में जिग़र रखने लगे

नाम जब से है जुड़ा मेरा तुम्हारे नाम से
लोग अपनी जेब में क्यूँ हैं हजर रखने लगे

टूट्ते ही दिल के पहुंचे हम इबादतगाह में
पावँ देखो लड़खड़ा कर हम किधर रखने लगे

यूँ तो कहते थे "मुसाहिब" आज से पहले भी पर
आप से मिलकर ग़ज़ल में हम असर रखने लगे

हजर - Stone

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Pahle to janaab chand sa humsafar pane ki mubarakbaad...
Aur naye safar ki bhi..
तुझको तेरा हमसफ़र इतना मुबारक यार कि
तुझको मुझसे दूर होने का भी कोई ग़म न हो :)

Aur apni to jeb hi fati hai kagaz tikta nahi pathar to door ki baat hai.....

Gurudev ye reply to maine dekha hi nahi tha, bilkul dil nikaal kar rakh diya hai aapne...
kuch bola nahi ja raha mujhse...