Author Topic: Guftgoo Renu Nayar ji se  (Read 297 times)

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Musaahib

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #15 on: November 20, 2014, 11:36:23 AM »
Renu Jee Namaskar...

Jab sab sawaal kar rahe hai or sabhi koshish kar rahe hai ki is safar ko yaadgaar bana diya jaye to maine bhi socha ki kyun na  khud ko bhi is kaafile se jodkar khud ko yaadgaar pal ka hissa bana luN.. :)
Mera sawaal thoda sa selfishness se bhara hai kyuki hindvi ka sadasya hone ki wazah se main hindvi ki behtari ke bare meN din raat sochta HuN.

Mera sawaal ye hai ki hum hindvi ko aur behtar banane ke liye kya kuch kar sakte hain.
Aap apne experiences share kareN ki online forums pe or kya kuch hona chahiye jiski kami aap hindvi meN mahsoos kar rahi hain.

:)

Aapke jawaab ka intezaar rahega...
 

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #16 on: November 20, 2014, 03:30:19 PM »
Ridham जी, मैंने 'अर्धनारीश्वर' शब्द राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम के प्रसंग में एक symbol की तरह use किया है ।


Musaahib जी, अभी मैं हिंदवी के और चल रहे threads को एक एक कर के देख रही हूँ । अगर मुझे लगा कि कहीं कोई सलाह दी जा सकती हैं, अवश्य दूँगी । वैसे हिंदवी टीम पहले सी ही बहुत बेहतर काम कर ही रही है ।   

ridham

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #17 on: November 20, 2014, 05:26:25 PM »
Ridham जी, मैंने 'अर्धनारीश्वर' शब्द राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम के प्रसंग में एक symbol की तरह use किया है ।


Musaahib जी, अभी मैं हिंदवी के और चल रहे threads को एक एक कर के देख रही हूँ । अगर मुझे लगा कि कहीं कोई सलाह दी जा सकती हैं, अवश्य दूँगी । वैसे हिंदवी टीम पहले सी ही बहुत बेहतर काम कर ही रही है ।   
shukriya ji  .....aap ka bachpan kaisgujra...jaroor bataitegaa

Ruby Singh

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #18 on: November 20, 2014, 07:55:21 PM »
उठाओ वक़्त को, उस ताक़ पे रख दो, जहां से वो
न कह पाये, न सुन पाये, न कोई चाल चल पाये
Uthao Waqt ko, us taak pe rakh do, jahaN se wo
na keh paye, na sun paye, na koi chaal chal paye
-Renu

Dosto !  Ek aisi shakshiyat jo waqt ko taak pe rakhne ka dam rakhti haiN
aaj guftgoo ke is suhaane safar pe hamaare saath haiN ....aaiye  ...swaaloN jwaaboN ki is adalat meiN.. swagat karte haiN  Renu Nayar ji ka
 

Renu Nayar    Renu Nayar   Renu Nayar   Renu Nayar   Renu Nayar

Note ...

Interview ek maah tak chalega
Plz adab mei rah kar sawaal ya baat kareN
Renu  Ji..Koe b sawaal ignore ya delete karwa sakti haiN

bahot khoob renu ji


Shukriya........

kunaal

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #19 on: November 21, 2014, 09:18:33 AM »
Deri se aane ke liye muafi ka talabgaar huN .. main aapka isteqbaal karta hun .. is guftugu pe .

Mera aap se abhi ke liye ek sawaal hai ..

Ki kisi ki shayri ko aap kis baat ko dekh ke pasand karti hai .. ya aap kya dekhna chahti hai shayri main.. jo aapko pasand  aaye

Baaki phir aaunga poochne

Kunaal

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #20 on: November 21, 2014, 02:02:16 PM »
रश्मि जी, आप के सवालों के जवाब

मेरा बचपन पंजाब के ही 'अबोहर' शहर में गुज़रा है ।

मेरे पिता जी का अपना कारोबार था, पर जब मैं 7th std. में थी, उनका इंतक़ाल हो गया था । उनके जाने के बाद मम्मी ने हम तीनों भाई-बहनों को अकेले ही पाला । मुझ से बड़ी एक बहन है, और मुझ से छोटा एक भाई ।



पहली रचनाओं में से एक का पंजाबी से हिंदी में अनुवाद

अलविदाओं के दौर में
*********************

अलविदाओं के दौर में
कभी अगर
मुझे तुम्हें अलविदा कहना पड़ा
तो, मैं
अपना कुछ सरमाया
तुम्हारे नाम कर जाऊँगी


कुछ बे-तरतीब पन्ने
कुछ अधलिखी नज़्में
और कुछ अनसुलझे सवाल भी

और
जब कभी भी मैं वापिस आई
मैं अपना सरमाया वापिस मांगूंगी
सूद समेत !


तब तक यूं करना
उन बेतरतीब पन्नों को
तरतीब दे कर देखना
उन अधलिखी नज़्मों के
पूरा ना होने की वजह ढूंढना
और,
उन अनसुलझे सवालों को
सुलझाने की कोशिश करना

जिस दिन ये सब हो जाये
मुझे वापिस आने के लिए कहना

पर, पता तुम्हें भी है
मुझे भी
असल से भी 
कहीं मुश्किल होता है
सूद लौटाना

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #21 on: November 21, 2014, 02:03:26 PM »
शुक्रिया कुणाल

शायरी वही पसंद आती है, जो दिल से कही गयी हो, और दिल तक पहुँची हो  :)

Fikr

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #22 on: November 21, 2014, 03:54:09 PM »
मैं आपको इक बात बताऊँ
आपने जो अनुवादित नज़्म लिखी है यहाँ
मुझे तो लगा ये यूँ ही कही गयी है
ताज़ी नज़्म सोंधी खुशबु।।।

Rashmi

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #23 on: November 21, 2014, 03:59:16 PM »
रश्मि जी, आप के सवालों के जवाब

मेरा बचपन पंजाब के ही 'अबोहर' शहर में गुज़रा है ।

मेरे पिता जी का अपना कारोबार था, पर जब मैं 7th std. में थी, उनका इंतक़ाल हो गया था । उनके जाने के बाद मम्मी ने हम तीनों भाई-बहनों को अकेले ही पाला । मुझ से बड़ी एक बहन है, और मुझ से छोटा एक भाई ।

so sad :(

पहली रचनाओं में से एक का पंजाबी से हिंदी में अनुवाद

अलविदाओं के दौर में
*********************

अलविदाओं के दौर में
कभी अगर
मुझे तुम्हें अलविदा कहना पड़ा
तो, मैं
अपना कुछ सरमाया
तुम्हारे नाम कर जाऊँगी


कुछ बे-तरतीब पन्ने
कुछ अधलिखी नज़्में
और कुछ अनसुलझे सवाल भी

और
जब कभी भी मैं वापिस आई
मैं अपना सरमाया वापिस मांगूंगी
सूद समेत !

aaahhhh kya kahooN
तब तक यूं करना
उन बेतरतीब पन्नों को
तरतीब दे कर देखना
उन अधलिखी नज़्मों के
पूरा ना होने की वजह ढूंढना
और,
उन अनसुलझे सवालों को
सुलझाने की कोशिश करना

जिस दिन ये सब हो जाये
मुझे वापिस आने के लिए कहना

पर, पता तुम्हें भी है
मुझे भी
असल से भी 
कहीं मुश्किल होता है
सूद लौटाना 
waaah bahut khoob aapki pahli rachna hi kamaal hai ,  kya turning point hai पर, पता तुम्हें भी है
मुझे भी
असल से भी 
कहीं मुश्किल होता है
सूद लौटाना


Renu ji jaise jaise aapko khol rahi hooN yakiN maaniye khud ko bahut nazdeek paa rahi hooN aap ke ...   :)
abhi kya ji abhi to bahut kuchh tatolna baaki hai   ;)... to aaiye aage baDte haiN
1.aap ko kis kisam ka litrature padne ka shauk hai ...sirf poetry ya kuchh or bhi
2.punjabi meiN aap ko kaun kaun se writer pasand haiN
3. hindi ke kaunse writer aap ko pasand haiN
4.kis writer ne aap ko sab se jyada inspire kiya hai ?

milte haiN ek short break ke baad
« Last Edit: November 21, 2014, 04:08:08 PM by Rashmi »
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Muditras

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #24 on: November 21, 2014, 06:30:59 PM »
Renu ji... Pehle to main der se aane ke liye muaafi maangna chaahungi... Aapse aur baaqi sabse bhi.
Renu ji, jitni khoobsurat ye nazm thi... Lagta hai aap arse se shaairi kar rahi hain... Bus aapne use qaagaz pe utaarna der se shuru kiya. :) Main ye poochhna chaahungi... Ki ghazal aur nazm mein se aapko kya zyada pasand hai? Aur kya aapko lagta hai ki ghazal mein behr aur baaqi niyam kaheen na kaheen kaifiyat ke paaon ki zanjeer ban jaate hain?

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #25 on: November 22, 2014, 05:13:15 AM »
Renu  जी आपका स्वागत है ,आपका परिचय पढ़कर और खुशी हुई की आज भी आप लिखती है और Hindvi के मंच पर नए और कुछ पुराने रचनाकारों को उत्साहित एवं लेखन के अपने बेहतरीन अनुभवों से हमें मार्गदर्शित करेंगी , मज़ा आएगा सवालो और जवाबो को पढ़कर ...स्वागत और कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं . विजय शंकर मिश्रा :)


विजय शंकर मिश्र जी शुक्रिया ख़ुलूस के लिए

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #26 on: November 22, 2014, 05:14:39 AM »
मैं आपको इक बात बताऊँ
आपने जो अनुवादित नज़्म लिखी है यहाँ
मुझे तो लगा ये यूँ ही कही गयी है
ताज़ी नज़्म सोंधी खुशबु।।।



शुक्रिया फ़िक्र साहिब  :)

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #27 on: November 22, 2014, 05:16:49 AM »
रश्मि जी, मेरे जवाबों को पसंद करने के लिए शुक्रिया, नज़्म पसंद करने का भी शुक्रिया, आपके बाकी सवालों के जवाबों के साथ जल्द हाज़िर हूँगी ।

renu nayyar

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #28 on: November 22, 2014, 05:18:36 AM »
Renu ji... Pehle to main der se aane ke liye muaafi maangna chaahungi... Aapse aur baaqi sabse bhi.
Renu ji, jitni khoobsurat ye nazm thi... Lagta hai aap arse se shaairi kar rahi hain... Bus aapne use qaagaz pe utaarna der se shuru kiya. :) Main ye poochhna chaahungi... Ki ghazal aur nazm mein se aapko kya zyada pasand hai? Aur kya aapko lagta hai ki ghazal mein behr aur baaqi niyam kaheen na kaheen kaifiyat ke paaon ki zanjeer ban jaate hain?


शुक्रिया मुदिता , नज़्म पसंद करने का भी बेहद शुक्रिया ।

बाकी बातें थोड़ी देर बाद  :)

raazkibaat

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Re: Guftgoo Renu Nayar ji se
« Reply #29 on: November 22, 2014, 02:23:28 PM »
नमस्कार रेनू जी। आपके बारे जानकर अच्छा लगा।
आपके पसंदीदा लेखक हिंदी और पँजाबी के कौन -कौन हैं जिन्हें आप हमेशा पढ़ना चाहेंगी?