Author Topic: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ  (Read 83 times)

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Musaahib

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कल जो होना है आज क्या सोचूँ
दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ

जो सितमगर मिरा ख़ुदा निकला
हर सितमगर को क्या ख़ुदा सोचूँ

जब भी मिलता हूँ आपसे मैं बस
दिल से दिल तक का रास्ता सोचूँ

देखता हूँ जहाँ तुम ही तुम हो
क्या रखूं तुमसे फासला सोचूँ

ज़िन्दगी दूर ले गयी उसको
जिस किसी को मैं बारहा सोचूँ

जब खुदा सुन के अनसुना कर दे
क्यूँ "‪#‎मुसाहिब‬" करे दुआ सोचूँ

बारहा - everytime

Rashmi

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #1 on: November 08, 2014, 07:15:43 AM »
कल जो होना है आज क्या सोचूँ
दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
waah dard aaye to phir dawa sochuN
जो सितमगर मिरा ख़ुदा निकला
हर सितमगर को क्या ख़ुदा सोचूँ
kya kahne. Bahut khoob


जब भी मिलता हूँ आपसे मैं बस
दिल से दिल तक का रास्ता सोचूँ
waaaah
देखता हूँ जहाँ तुम ही तुम हो
क्या रखूं तुमसे फासला सोचूँ
are kya kahne ...bahut khoob

ज़िन्दगी दूर ले गयी उसको
जिस किसी को मैं बारहा सोचूँ

जब खुदा सुन के अनसुना कर दे
क्यूँ "‪#‎मुसाहिब‬" करे दुआ सोचूँ
waaah kya tanaj hai
बारहा - everytime
bahut khoob har sher umda laazbaab ghazal
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Sagar

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #2 on: November 08, 2014, 09:07:58 AM »
Kya kahun..itni khoobsoorat ghazal, ke padhte waqt chehre pe ek muskaan  bani rahi... Main ye sochun ke ab kya sochuN...

Behtareen ghazal ke liye badhaai.. Aur bhi padhne ka ji kar raha hai ab to..
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Reeta tyagi

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #3 on: November 08, 2014, 10:26:54 AM »
Lazabaab ek ek sher

कल जो होना है आज क्या सोचूँ
दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
waaah

Musaahib

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #4 on: November 10, 2014, 06:38:18 AM »
Aap sabon ka bahut shukriyaa....is nacheez ki islaahi koshish ko aapne itna saraha....aap sab ke pyaar ka ehsaanmand huN..

suresh

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #5 on: November 21, 2014, 10:00:56 AM »
ज़िन्दगी दूर ले गयी उसको
जिस किसी को मैं बारहा सोचूँ

bahut bahut khoob Mussahib ji.......

masoomshayer

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #6 on: November 22, 2014, 02:40:45 AM »
bahut khoob bahut achaa laga padh ke

Fikr

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #7 on: November 23, 2014, 02:21:58 PM »
सादा और अच्छी ग़ज़ल हुई है
इसी सादगी में रहो अच्छी लगती है तुमपे

Muditras

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Re: दर्द आये तो फिर दवा सोचूँ
« Reply #8 on: November 25, 2014, 05:30:21 PM »
Jo sitamgar mera Khuda  nikla,
Har sitamgar ko kya Khuda sochuun...
Bahut badhiya ghazal musaahib ji... :)