Author Topic: Josh Malihabadi  (Read 44 times)

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Sagar

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Josh Malihabadi
« on: August 15, 2014, 02:09:58 PM »
सोज़े-ग़म देके उसने ये इरशाद किया ।
जा तुझे कश्मकश-ए-दहर से आज़ाद किया ।।

वो करें भी तो किन अल्फ़ाज में तिरा शिकवा,
जिनको तिरी निगाह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया ।

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया ।

इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद,
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया ।

इतना मासूम हूँ फितरत से, कली जब चटकी
झुक के मैंने कहा, मुझसे कुछ इरशाद किया

मेरी हर साँस है इस बात की शाहिद-ए-मौत
मैंने ने हर लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया

मुझको तो होश नहीं तुमको खबर हो शायद
लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया

वो तुझे याद करे जिसने भुलाया हो कभी
हमने तुझ को न भुलाया न कभी याद किया

कुछ नहीं इस के सिवा 'जोश' हारीफ़ों का कलाम
वस्ल ने शाद किया, हिज्र ने नाशाद किया
« Last Edit: September 23, 2014, 11:24:59 AM by Sagar »
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Sagar

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Re: Josh Mahilabadi
« Reply #1 on: August 15, 2014, 02:10:36 PM »
ज़िन्दगी ख़्वाबे-परीशाँ है कोई क्या जाने
मौत की लरज़िशे-मिज़्गाँ है कोई क्या जाने

रामिश-ओ-रंग के ऐवान में लैला-ए-हयात
सिर्फ़ एक रात की मेहमाँ है कोई क्या जाने

गुलशने-ज़ीस्त के हर फूल की रंगीनी में
दजला-ए-ख़ूने-रगे-जाँ है कोई क्या जाने

रंग-ओ-आहंग से बजती हुई यादों की बरात
रहरवे-जादा-ए-निसियाँ है कोई क्या जाने
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Jashn

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Re: Josh Mahilabadi
« Reply #2 on: September 05, 2014, 12:10:44 PM »
WAH KYA KAHNEY WAH

Aanchal

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Re: Josh Malihabadi
« Reply #3 on: November 05, 2014, 01:40:29 PM »
आअह्हहा बहुत खूबसूरत कलाम है |
शानदार इन्तेखाब जनाब..!!
« Last Edit: November 05, 2014, 01:42:14 PM by Aanchal »