Author Topic: रात के तीन बजे  (Read 55 times)

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Venus Sandal

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रात के तीन बजे
« on: August 08, 2014, 02:07:39 PM »

ना आवाज़ ही किसी की 

ना ही खटका कोई

चाँद भी ऊँघ ऊँघ के

सो गया हो मानो

दूर दूर तक फैले सन्नाटे 

बारिश में गीली हुई सड़कें 

थक के सो गयी हो ज्यूँ

पेड़ भी अपने काँधे झुकाए 

गहरी सी नींद में लगते हैं

पर रात के इस तीन बजे 

बस दो चीज़ें ही लगातार 

बेसुधी में गोल-2 घूम रही हैं 


इक मेरी छत का ये पँखा

और

इक मेरी ये दो आँखें !!!!!!! 

:- ज़ोया
zoya****

Lau  hi lau sii ..... saik nhi si
Vekh lya main jugnu phd ke
:-Meesa.

Sagar

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Re: रात के तीन बजे
« Reply #1 on: August 09, 2014, 04:48:55 AM »
sundar
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Venus Sandal

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Re: रात के तीन बजे
« Reply #2 on: August 13, 2014, 01:30:12 PM »
:)
Dhanywaad sagar ji
zoya****

Lau  hi lau sii ..... saik nhi si
Vekh lya main jugnu phd ke
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