Author Topic: न तुम मेरे करीब आती  (Read 64 times)

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Sagar

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न तुम मेरे करीब आती
« on: August 07, 2014, 12:27:17 PM »
न तुम मेरे करीब आती
न मैं यूँ मुत्मईन होता
न आतीं ग़ज़लें होठों तक़
न बयाँ मेरा हसीन होता
न तुम करती सवाल मुझसे
न मैं खामोश होकर के
तुम्हारे गेसुओं में छिपता चला जाता
न ये होता
न वो होता
न हम एक दूसरे में एक दूसरे को देखते रहते
न तुम मेरी मुहब्बत का सबब बनकर आईने संग
घंटों अकेले में मुझे सोचा किया करती
न मैं तुमसे जुदा होकर ज़माने को ठुकराता
ज़रा सा मैं संभल जाता
ज़रा सा तुम भी सुन लेती  तुम्हारे अपने लोगों की सभी मज़बूरियों को और
न करती शिक़वा यूँ खुद से
न मुझसे वो कहा होता जो न जाने किस तरह तुमने वक़्त-ऐ-रुखसत कह दिया मुझसे
न ये सब कभी होता
न मैं खुद से लड़ा होता
न रातों को वो सब बातें मेरे बिस्तर से नींदों को ऐसे लूट ले जातीं
न मैं शायर हुआ होता
न उर्दू में ग़िला करता

न तुम मेरे क़रीब आती
न मैं यूँ मुतमईन होता

~Sagar
« Last Edit: August 07, 2014, 12:33:08 PM by Sagar »
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Sagar

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Re: न तुम मेरे करीब आती
« Reply #1 on: August 07, 2014, 12:35:56 PM »
ye prose ghalat ho gaya .. moderates please delete kar deN isse
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

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Re: न तुम मेरे करीब आती
« Reply #2 on: August 07, 2014, 04:44:43 PM »
ye prose ghalat ho gaya .. moderates please delete kar deN isse
Sagar bataiye plz agar edit karna hai to maiN kar deti hooN bataiye kahaN kya likhna chahte haiN
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Sagar

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Re: न तुम मेरे करीब आती
« Reply #3 on: August 08, 2014, 02:46:59 AM »
Main bas kuchh likh raha tha aur do alag alav thougths mix ho gaye.. Pura sense khtm ho gaya.. Is liye kaha delete karne ko..
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ