Author Topic: चाँद पर बहुत सन्नाटा है  (Read 58 times)

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Sajjan Singh

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चाँद पर बहुत सन्नाटा है
« on: August 06, 2014, 08:59:23 AM »
सोचा था एक बार कि चाँद को छूकर आयेंगे,
फिर सोचा कि तुम्हें छोड़कर कैसे जायेंगे ,
तुम्हारे बिना तो चाँद भी फीका लगेगा ,
तुम भी साथ चल पड़े,सफ़र आसान लगने लगा,
मुझे पता था की तुम मंज़िल तक साथ दोगे,
सफ़र की हर मुश्किल का हमने मिलकर सामना किया,
मंज़िल नज़र आने लगी ..आँखों में चमक आ गई ,
तुमने आत्मविश्वाश बढाया ..कस कर मेरा हाथ थामे रहे,
रास्ते में एक जगह धुंध सी छाई,तुमने मेरा हाथ धीरे से छोड़ दिया
और कहा तुम आगे बड़ो मैं कुछ देर में आती हूँ,
मैं तुम्हारे वादे के भरोसे आगे बढता गया
चाँद भी नज़दीक आ गया था,
सोचा तुम चाँद को देखोगी तो बहुत खुश होगी।
मैं चाँद पर पहुच कर आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ,
अच्छा हुआ की तुम नहीं आई ..
वरना चांदनी ....तुम्हारा नूर देख कर पीली पड़ जाती,
अब मैं तुम्हें कैसे बताऊँ की चाँद कैसा दिखता है,
पता है चाँद पर बहुत सन्नाटा है,
न कोई हंसी है ..न कोई अपना पन ...
यहाँ अकेलापन और ख़ामोशी है,
चाँद तो खैर अब मेरे पास है ...पर चांदनी नहीं,
तुम बीच रास्ते से चले गए थे,
शायद किसी और को भी चाँद तक पहुचना होगा।

Rashmi

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Re: चाँद पर बहुत सन्नाटा है
« Reply #1 on: August 06, 2014, 05:06:39 PM »
waaaah bahut khoob
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Venus Sandal

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Re: चाँद पर बहुत सन्नाटा है
« Reply #2 on: August 08, 2014, 09:01:39 AM »
Pta he chaand pr bahut snnaata he


Hmnn

Ye ek line hi ...mere liye puri nazm si he

Pyari nazam hui he

zoya****

Lau  hi lau sii ..... saik nhi si
Vekh lya main jugnu phd ke
:-Meesa.