Author Topic: दो पल ग़र रुक जाएँ तो साँसों में कुछ ज़िन्दगी धड़के  (Read 46 times)

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Sajjan Singh

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दो पल ग़र रुक जाएँ तो साँसों में कुछ ज़िन्दगी धड़के
कुछ देर को दिल में तू सो जाए तो बदन को कुछ हरकत मिले
लहू में घुलकर दौड़ता रहता है हाँ और ना का सैलाब
लहू जम जाए तो कुछ फैसला हो सके
उढ़ा दो चाँद को आज कफ़न कि अमावस और पूर्णिमा का ये सिलसिला छूटे।