Author Topic: ख़्वाब मरते हैं  (Read 101 times)

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Sagar

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ख़्वाब मरते हैं
« on: July 21, 2014, 03:57:39 PM »
ख़्वाब मरते हैं
हाँ  ये न दिल हैं, न आँखें, न साँसे
कि जो रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिख़र जायेँ

ये गुमाँ भी होता है
के ख़्वाब तो रौशनी हैं, नवाँ हैं, हवा हैं
ये हर्फ़ भी हैं
नूर हैं
सुकरात हैं
मंसूर हैं

पर सुनो ज़रा
दरिया-ऐ-ज़ीस्त में हाथ दाल कर देखो
आब-ऐ-अफ़कार में डूबे हुए ख़्वाब
उन मछलियों की मानिंद हैं
जो बह रही हैं
एक सिम्त में
इन धारों को टोकती
कुछ जालों से अनजान
जिनको किसी माहगीर ने बिछाया है
अपने बच्चों का पेट भरने के लिए
जो इन्हे पकड़ता है और बेंचता है उस बाज़ार में
जहां ख़्वाब मरते भी हैं
बिकते भी हैं
जहां दाम लगता है
इनकी नस्ल देख कर
जहां नीलामी होती है
और जहां वो सब होता है
जो नज़्मों में लिखा नहीं जाता


वो ख़्वाब कोई और होंगे जिनका ज़िक्र अहमद फ़राज़ किया करते थें
मैंने तो ख़्वाबों को मरते देखा है
जिस्म की मौत से पहले
दरिया-ऐ-हयात से निकल कर
दम तोड़ते हुए
तड़पते हुए
छटपटाते हुए
ख़्वाब मरते हैं

~Sagar
---
रेज़ा-रेज़ा - shattered
हर्फ़ -  Words
नूर - light
सुकरात : Socrates
मंसूर : martyr
दरिया-ऐ-ज़ीस्त - River of life
आब-ऐ-अफ़कार - water of thoughts and meditations
मानिंद - like
सिम्त: direction
माहगीर: Fisherman
दरिया-ऐ-हयात - River of life
« Last Edit: July 22, 2014, 12:47:51 PM by Sagar »
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #1 on: December 19, 2014, 05:26:56 PM »
waaah saagar kai baar apne aap pe hairaani hoti hai ke itna achha likha hua ,,,kaise nazroN se ojhal rah gaya
khawawoN ke marne ka dard bahut teekshan hai ....jise aap ke shabdoN ne poori tarah se nibhaiya hai


aate rahiye khush rahiye duaaoN ke saath
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Musaahib

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #2 on: December 22, 2014, 05:22:55 AM »
Waah Waah Waah....bilkul bhai aap arjun ke teer ho baat seedher dil ko cheer kar nikal jati hai...
bahut bahut umdaa'h....

Fikr

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #3 on: December 22, 2014, 07:29:03 AM »
kya hi kahne waah waahhh .........

Sagar

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #4 on: December 22, 2014, 09:08:26 PM »
:)
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

vsm1978

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #5 on: January 15, 2015, 09:07:37 AM »
कमाल के अल्फ़ाज़ और अभिवयक्ति है ,वाह्ह्ह साहेब वाह्ह !

ridham

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #6 on: January 17, 2015, 09:51:03 AM »
waaaah bahut sundar hai bahut sundar  :)

seema

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Re: ख़्वाब मरते हैं
« Reply #7 on: April 17, 2015, 03:41:26 PM »
बहुत ख़ूबसूरती से अल्फ़ाज़ों को पिरोया है

क्या बात है