Author Topic: क़ैसर'-उल जाफ़री  (Read 110 times)

0 Members and 1 Guest are viewing this topic.

Sagar

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 326
  • Gender: Male
  • Be melting snow~ Rumi
क़ैसर'-उल जाफ़री
« on: July 07, 2014, 03:44:36 PM »
बरसों के रत-जगों की थकन खा गई मुझे
सूरज निकल रहा था के नींद आ गई मुझे

रक्खी न जिंदगी ने मेरी मुफलिसी की शर्म
चादर बना के राह में फैला गई मुझे

मैं बिक गया था बाद में बे-सरफा जान कर
दुनिया मेरी दुकान पे लौटा गई मुझे

दरिया पे एक तंज समझिए के तिश्नगी
साहिल की सर्द रेत में दफना गई मुझे

ऐ ज़िंदगी तमाम लहू राएगाँ हुआ
किस दश्त-ए-बे-सवाद में बरसा गई मुझे

कागज़ का चाँद रख दिया दुनिया ने हाथ में
पहले सफर की रात ही रास आ गई मुझे

क्या चीज़ थी किसी की अदा-ए-सुपुर्दगी
भीगे बदन की आग में नहला गई मुझे

‘कैसर’ कलम की आग का एहसान-मंद हूँ
जब उँगलियाँ जलीं तो गज़ल आ गई मुझे
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

  • Global Moderator
  • ***
  • Posts: 1893
  • Gender: Female
  • Hum se khafa zamaana to Hum bhi jamaane se khafa
Re: क़ैसर'-उल जाफ़री
« Reply #1 on: July 07, 2014, 04:24:49 PM »
बरसों के रत-जगों की थकन खा गई मुझे
सूरज निकल रहा था के नींद आ गई मुझे

रक्खी न जिंदगी ने मेरी मुफलिसी की शर्म
चादर बना के राह में फैला गई मुझे

मैं बिक गया था बाद में बे-सरफा जान कर
दुनिया मेरी दुकान पे लौटा गई मुझे

दरिया पे एक तंज समझिए के तिश्नगी
साहिल की सर्द रेत में दफना गई मुझे

ऐ ज़िंदगी तमाम लहू राएगाँ हुआ
किस दश्त-ए-बे-सवाद में बरसा गई मुझे

कागज़ का चाँद रख दिया दुनिया ने हाथ में
पहले सफर की रात ही रास आ गई मुझे

क्या चीज़ थी किसी की अदा-ए-सुपुर्दगी
भीगे बदन की आग में नहला गई मुझे

‘कैसर’ कलम की आग का एहसान-मंद हूँ
जब उँगलियाँ जलीं तो गज़ल आ गई मुझे
pahli baar paD rahi hoon is poet ko or apni agyanta pe afsos ho raha hai .......behad shukriya sagar jo mujhe aisi khoobsoorat peshkash se  milwaya mujhe,,,,,umda ghazal share ki hai aap ne,,,,,,ehsaasoN ki baadshahiyat
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Sagar

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 326
  • Gender: Male
  • Be melting snow~ Rumi
Re: क़ैसर'-उल जाफ़री
« Reply #2 on: July 07, 2014, 05:19:32 PM »
Rashmi ji.. agar aisi baat hai to ek aur padh lijiye:

यूँ बड़ी देर से पैमाना लिए बैठा हूँ
कोई देखे तो ये समझे के पिए बैठा हूँ

आख़िरी नाव न आई तो कहाँ जाऊँगा
शाम से पार उतरने के लिए बैठा हूँ

मुझ को मालूम है सच ज़हर लगे है सब को
बोल सकता हूँ मगर होंट सिए बैठा हूँ

लोग भी अब मेरे दरवाज़े पे कम आते हैं
मैं भी कुछ सोच के जंजीर दिए बैठा हूँ

ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिए बैठा हूँ

कम से कम रेत से आँखें तो बचेंगी ‘कैसर’
मैं हवाओं की तरफ पीठ किये बैठा हूँ
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

  • Global Moderator
  • ***
  • Posts: 1893
  • Gender: Female
  • Hum se khafa zamaana to Hum bhi jamaane se khafa
Re: क़ैसर'-उल जाफ़री
« Reply #3 on: July 07, 2014, 05:27:52 PM »
Rashmi ji.. agar aisi baat hai to ek aur padh lijiye:

यूँ बड़ी देर से पैमाना लिए बैठा हूँ
कोई देखे तो ये समझे के पिए बैठा हूँ

आख़िरी नाव न आई तो कहाँ जाऊँगा
शाम से पार उतरने के लिए बैठा हूँ

मुझ को मालूम है सच ज़हर लगे है सब को
बोल सकता हूँ मगर होंट सिए बैठा हूँ

लोग भी अब मेरे दरवाज़े पे कम आते हैं
मैं भी कुछ सोच के जंजीर दिए बैठा हूँ

ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिए बैठा हूँ

कम से कम रेत से आँखें तो बचेंगी ‘कैसर’
मैं हवाओं की तरफ पीठ किये बैठा हूँ
waaah bahut khoob ,,,,bahut hi khoob bol ke padne meiN  achha lag raha hai :) ...jio Sagar
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale

Sagar

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 326
  • Gender: Male
  • Be melting snow~ Rumi
Re: क़ैसर'-उल जाफ़री
« Reply #4 on: July 07, 2014, 05:35:31 PM »
Rashmi ji Anup Jalota ji ki aawaaz me youtube pe aap ko ek video milega - tumhaare shahar ka mausam bada suhaana lage... mai ek shaam chura lun agar bura na lage


ye bhi Kaisar saa'ab ki hi creation hai.. mujhe isi se inke baare me pata chala tha.. maine pehli baar suna tha to mujhe waisa hi laga tha jaisa aap ko laga ke itna bada fankar kaise miss ho gaya humse :-))

« Last Edit: July 07, 2014, 05:37:24 PM by Sagar »
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Sagar

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 326
  • Gender: Male
  • Be melting snow~ Rumi
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ