Author Topic: ठहर जाओ  (Read 38 times)

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Sagar

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ठहर जाओ
« on: July 07, 2014, 02:26:19 AM »
 ठहर जाओ
बस इसी पल में
ठहर जाओ अपनी जुल्फों में उंगलियां उलझाये
खिड़की के पास खड़े
जब के तुम्हारा आँचल आधा सरक चूका है तुम्हारे काँधे से
जबकि तुम्हारे होंठ आधे खुले हैं किसी गीत को गुनगुनाते
ठहर जाओ इसी पल में
मुझे हाथ बढ़ाने दो
 अपने चेहरे की तरफ़
मुझे लेने दो अपनी खुली  आँखों से उन लफ़्ज़ों को
के जिनके बिना  ग़ज़ल न हो
लेने दो मुझे अपने ठहरे हुए बदन से उन रंगीनियों को
उस लचक को
उस महक को
के जिनके बिना ज़िन्दगी ज़िन्दगी न लगे
ठहर जाओ मेरे लिए
इस एक पल में
मैं सांस सांस जी लूँ तुम्हे
भर लूँ तुम्हें अपनी आँखों में
इससे पहले के शाम ढल जाए
और तुम चली जाओ मुझसे दूर
इससे पहले के ये अकेले अँधेरे कमरे तहखाने बन जाएँ
मेरी ज़ीस्त कफ़स हो जाए
ठहर जाओ मेरी साँसों को शायरी दे दो
मेरे होने को कोई मानी मिले
ठहर जाओ इस एक पल में
मेरे लिए
मेरे हमनफ़स
« Last Edit: July 07, 2014, 02:29:15 AM by Sagar »
मोमिन न मैं फ़िराक न ग़ालिब न मीर हूँ
इक आग का गोला हूँ मैं अर्जुन का तीर हूँ

Rashmi

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Re: ठहर जाओ
« Reply #1 on: July 07, 2014, 03:33:24 AM »
ठहर जाओ
बस इसी पल में
ठहर जाओ अपनी जुल्फों में उंगलियां उलझाये
खिड़की के पास खड़े
जब के तुम्हारा आँचल आधा सरक चूका है तुम्हारे काँधे से
जबकि तुम्हारे होंठ आधे खुले हैं किसी गीत को गुनगुनाते
ठहर जाओ इसी पल में
मुझे हाथ बढ़ाने दो
 अपने चेहरे की तरफ़
मुझे लेने दो अपनी खुली  आँखों से उन लफ़्ज़ों को
के जिनके बिना  ग़ज़ल न हो
लेने दो मुझे अपने ठहरे हुए बदन से उन रंगीनियों को
उस लचक को I
उस महक को
के जिनके बिना ज़िन्दगी ज़िन्दगी न लगे
ठहर जाओ मेरे लिए
इस एक पल में
मैं सांस सांस जी लूँ तुम्हे
भर लूँ तुम्हें अपनी आँखों में
इससे पहले के शाम ढल जाए
और तुम चली जाओ मुझसे दूर
इससे पहले के ये अकेले अँधेरे कमरे तहखाने बन जाएँ
मेरी ज़ीस्त कफ़स हो जाए
ठहर जाओ मेरी साँसों को शायरी दे दो
मेरे होने को कोई मानी मिले
ठहर जाओ इस एक पल में
मेरे लिए
मेरे हमनफ़स
Thahar jaao mere hamnafas ...waaah...Thahar jaao meri saanso ko shayrii de do.......kamaal.....
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale