Author Topic: ghazal men alif wasl ka niyam  (Read 132 times)

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Jashn

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ghazal men alif wasl ka niyam
« on: June 29, 2014, 10:13:53 AM »
ग़ज़ल मेँ उच्चारण का बड़ा महत्व है ।

किसी लफ्ज़ के आखिर मेँ बिना मात्रा का कोई अक्षर आनेँ पर और उसके ठीक बाद का शब्द किसी स्वर से शुरू होनेँ पर स्वर और व्यँजन का योग कर के पढ़ लिया जाता है । उदाहरण

सवाल उनका जवाब उनका सकूत उनका खिताब उनका

हम उनकी महफिलोँ मेँ सर न करते खम तो क्या करते

प्रस्तुत शेर एक निश्चित वज्न क्रम पे आधारित है । जो है 1222fr timeमुफाईलुन चार बार ।

प्रस्तुत शेर को एक फिल्मी गीत जो कि इस वज्न क्रम 1222चार बार पे आधारित है पर गाकर देखेँ जिसके बोल हैँ

मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता

अगर तूफाँ नहीँ आता किनारा मिल गया होता

... गाते समय यूँ गायेँ
.
.

 सवालुन का /जवाबुन का/ सकूतुन का/ खिताबुनका

ह मुन की मह/फिलोँ मेँ सर /न करते खम/ तो क्या करते


आपको महसूस होगा व्यँजन और स्वर का योग

जश्न

Nayaab

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Re: ghazal men alif wasl ka niyam
« Reply #1 on: June 29, 2014, 11:33:20 AM »
Jiyo Jashn Bhai..kya zuroori maalumaat dee hai...behad shukriya

Rashmi

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Re: ghazal men alif wasl ka niyam
« Reply #2 on: June 29, 2014, 03:24:59 PM »
Very informative
Rashmi Sharma

gooDe akkhar ,fatti sukki
adiyo meri gaachi mukki
sukke hanjhu akkhaN waale
haaDa! akkhar mooloN kaale