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Islaah Ke Liye / Test, just a test
« Last post by XRumerTest on July 14, 2018, 08:57:59 AM »
Hello. And Bye.
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Gosha-e-Nazm / Suno
« Last post by Rashmi on June 27, 2018, 10:45:49 PM »
ये उन सब के लिए जिन्हें पड़ते पड़ते मैं नतमस्तक हो जाती हूँ
और प्रशंसा के लिए शब्द बहुत छोटे पढ़ जाते हैं ☺

सुनो
ये जो तुम लिख लेते हो न!
इतना गहरा!
इतना संवेदनशील!
निराले ढंग से !
न जाने विचारों
का कौन सा कुआं
खोद लेते हो
देवता बन
सागर मंथन कर निकली
अमृतमय
तुम्हारी कविताएँ
निरुत्तर कर देती हैं
भाव मन के भीतर
कहीं गहरे उतर जाते हैं
तुम शायद सोचते होओगे
के मैं सराहना क्यों नहीं करती
सराहना मेरे अंग अंग
नें नृत्य करती है
परंतु प्रतिउत्तर के
लिए शब्द भी तो
चाहिए न
और मेरे शब्द
मौन धारण कर
बैठे हैं
शायद
किसी उपवास पे है कुछ दिन
किसी नई
कविता की तलाश में
जो सिर्फ मेरी हो
भूखे शब्द
कहाँ से जान लाएं
छप्पन भोगमय
कविता को सराहने को
रुको!
लौट आने दो मेरे शब्दों को
उपवास से  ☺
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Kya khoob ghazal hui hai...waah bhai :-)
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Islaah Ke Liye / Re: ग़ज़ल
« Last post by Rashmi on June 27, 2018, 12:25:17 PM »


मैं क़तरा हुँ मगर सागर तड़पता छोड़ आया हुँ
ना जाने कितने अपनो को मैं रोता छोड़ आया हुँ

वो दो नदियाँ जो बहती थी कभी अपनी ही आँखो से
मैं उन नदियों के पानी को निकलता छोड़ आया हुँ

गुलों से अब नया रिश्ता कोई हम भी बनायेगे
जुदा कर के मैं ख़ारों को मचलता छोड़ आया हुँ

लबों से जाम पीने की सज़ा मिलती तो क्या मिलती
सज़ा ये है मैं होंठों को महकता छोड़ आया हुँ

भला इससे ज़्यादा अपना मैं नुक़सान क्या करता
मैं एक नाज़ुक सी लड़की को सँवरता छोड़ आया हुँ

मेरे गाँव के हुजरे में बहुत सी याद अब भी है
सो अपने गाँव के हुजरे को ख़स्ता छोड़ आया हुँ

मेरी पापा की तनख़्वाह से कही ज़्यादा रही क़ीमत
बुरा कह के दुका में महँगा बस्ता छोड़ आया हुँ

भटकते क्यों ना फिर सागर बला के दश्त ए पैकर में
निकलने का जो रस्ता था वो रस्ता छोड़ आया हुँ
waaah bahut khoobsoorat ghazal hui hai
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Islaah Ke Liye / Re: ग़ज़ल
« Last post by Aarti on June 26, 2018, 11:45:40 AM »
Quote
वो दो नदियाँ जो बहती थी कभी अपनी ही आँखो से
मैं उन नदियों के पानी को निकलता छोड़ आया हुँ
 Agar nikalta ki jagah chalakta ho to .. ek bar dekhen
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Islaah Ke Liye / Re: ग़ज़ल
« Last post by Aarti on June 26, 2018, 11:43:26 AM »
Bahut achi ghazal hai aapki ... Sare ashaar bahut ache hain
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ग़ज़ल

अब मेरे दिल में नहीं है घर तेरा
ज़िक्र होता है मगर अक्सर तेरा

भूल तो जाऊँ तुझे पर क्या करूँ
उँगलियों को याद है नम्बर तेरा

कर गया ज़ाहिर तेरी मजबूरियां
टाल देना बात यूँ हँस कर तेरा

शुक्र है! आया है पतझड़ लौट कर
बाग़ से दिखने लगा फिर घर तेरा

वो मुलाक़ात आख़िरी क्या खूब थी
भूल जाना लाश में खंजर तेरा

बावरेपन की 'नकुल' अब हद हुई
इश्क़ उसको? वो भी मुझसे ? सर तेरा!
. Swagat hai nakul ji aapka ..Or bahut khoobsurat ghazal ke liye mubarakbaad... Har sher mayaarii hai ......Aate rahiye ☺️
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Islaah Ke Liye / ग़ज़ल
« Last post by Asad Mehdi on June 25, 2018, 02:09:57 PM »


मैं क़तरा हुँ मगर सागर तड़पता छोड़ आया हुँ
ना जाने कितने अपनो को मैं रोता छोड़ आया हुँ

वो दो नदियाँ जो बहती थी कभी अपनी ही आँखो से
मैं उन नदियों के पानी को निकलता छोड़ आया हुँ

गुलों से अब नया रिश्ता कोई हम भी बनायेगे
जुदा कर के मैं ख़ारों को मचलता छोड़ आया हुँ

लबों से जाम पीने की सज़ा मिलती तो क्या मिलती
सज़ा ये है मैं होंठों को महकता छोड़ आया हुँ

भला इससे ज़्यादा अपना मैं नुक़सान क्या करता
मैं एक नाज़ुक सी लड़की को सँवरता छोड़ आया हुँ

मेरे गाँव के हुजरे में बहुत सी याद अब भी है
सो अपने गाँव के हुजरे को ख़स्ता छोड़ आया हुँ

मेरी पापा की तनख़्वाह से कही ज़्यादा रही क़ीमत
बुरा कह के दुका में महँगा बस्ता छोड़ आया हुँ

भटकते क्यों ना फिर सागर बला के दश्त ए पैकर में
निकलने का जो रस्ता था वो रस्ता छोड़ आया हुँ
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Nakul ji .. khushaamdeed .... Aaapne pahli ghazal nahi balke shagun dala hai :)


अब मेरे दिल में नहीं है घर तेरा
ज़िक्र होता है मगर अक्सर तेरा
Quote
Khoobsurat matla hai ... Bahut universal khyaal hai

Quote
भूल तो जाऊँ तुझे पर क्या करूँ
उँगलियों को याद है नम्बर तेरा

Zahn n aur jismani aadat kya ajab talmel hai .. bahut practical ho k dekhen to aksar hum koe lafz bhool jaate hai.. jaise password ATM pin no. Magar humari.ungliyan nahin bhoolti... Theek jaise aapne phone no ki baat kahi sach baat hai..
कर गया ज़ाहिर तेरी मजबूरियां
टाल देना बात यूँ हँस कर तेरा

Quote
Bahut khoob hai
शुक्र है! आया है पतझड़ लौट कर
बाग़ से दिखने लगा फिर घर तेरा


Quote
Kya hi ajab hai.. patjhad is tarah se kisi ko kitna khoobsurat ho sakta hai kya hi khoob..
Ye sher shayed maine pahle bhi suna hai tab bhi acha laga tha ... Aaj padh k aur acha laga .. bahut acha sher hai ye apka
वो मुलाक़ात आख़िरी क्या खूब थी
भूल जाना लाश में खंजर तेरा
Quote

Waah bahut khoob
बावरेपन की 'नकुल' अब हद हुई
इश्क़ उसको? वो भी मुझसे ? सर तेरा!

Quote
sar tera .. hasi aa gayee itna acha expression hai..
Sar tera wah wah
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ग़ज़ल

अब मेरे दिल में नहीं है घर तेरा 
ज़िक्र होता है मगर अक्सर तेरा 

भूल तो जाऊँ तुझे पर क्या करूँ 
उँगलियों को याद है नम्बर तेरा 

कर गया ज़ाहिर तेरी मजबूरियां 
टाल देना बात यूँ हँस कर तेरा 

शुक्र है! आया है पतझड़ लौट कर 
बाग़ से दिखने लगा फिर घर तेरा 

वो मुलाक़ात आख़िरी क्या खूब थी 
भूल जाना लाश में खंजर तेरा 

बावरेपन की 'नकुल' अब हद हुई 
इश्क़ उसको? वो भी मुझसे ? सर तेरा! 


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