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Other language poetry => Kaavyanjali => Topic started by: Venus Sandal on July 28, 2014, 12:06:27 PM

Title: बस यूँ ही
Post by: Venus Sandal on July 28, 2014, 12:06:27 PM
ये ज़ज्बात, ये एहसास, ख्वावो-ख्याल
तीनो के तीनो वक़्त के मूरीद हैं
भरपूर वक़्त मिले खाने पीने को
तो तीनो खूब फलने फूलने लगते हैं

वक़्त का निवाला तोड़ तोड़ के
खूब सेहत बना लेते हैं
कलम भी तब अपनी पे आ जाती है

तीनो की संगत में बैठ
सुर्ख रंग में रंग जाती है

तीन से ये चार हो
फिर खूब दावत उड़ाते हैं

दिल के दर्द को नोच नोच के
बाहर ला-ला नोश फरमाते हैं
इसी बहाने दर्द कम भी हो जाता है

सब वक़्त का फेर है
अगर इसी वक़्त की किल्लत हो जाए
तो ये तीनो भूखे की मार से पस्त
चुपचाप दिल ओ दिमाग में

लघु निंद्रा में सोये पड़े रहें
कलम भी मेज़ की दराज़ में
उंघती रहेगी,बेचारी करे भी क्या

रोज़गार के चक्कर ,घर के किस्से
इनमे उलझ जाओ तो
सारा वक़्त यही खा जाएँ
बेचारे तीनो फाके ही रहेगे

सब वक़्त का फेर है
**********************
Title: Re: बस यूँ ही
Post by: Rashmi on July 28, 2014, 06:28:56 PM
ये ज़ज्बात, ये एहसास, ख्वावो-ख्याल

तीनो के तीनो वक़्त के मूरीद हैं

भरपूर वक़्त मिले खाने पीने को

तो तीनो खूब फलने फूलने लगते हैं

वक़्त का निवाला तोड़ तोड़ के

खूब सेहत बना लेते हैं

कलम भी तब अपनी पे आ जाती है

तीनो की संगत में बैठ

सुर्ख रंग में रंग जाती है

तीन से ये चार हो

फिर खूब दावत उड़ाते हैं

दिल के दर्द को नोच नोच के

बाहर ला-ला नोश फरमाते हैं
waah ...yatharth

इसी बहाने दर्द कम भी हो जाता है

सब वक़्त का फेर है

अगर इसी वक़्त की किल्लत हो जाए

तो ये तीनो भूखे की मार से पस्त

चुपचाप दिल ओ दिमाग में

लघु निंद्रा में सोये पड़े रहें

कलम भी मेज़ की दराज़ में

उंघती रहेगी,बेचारी करे भी क्या

रोज़गार के चक्कर ,घर के किस्से

इनमे उलझ जाओ तो

सारा वक़्त यही खा जाएँ

बेचारे तीनो फाके ही रहेगे

सब वक़्त का फेर है

samajh sakti hooN
**********************
bilkul sahi farmaya ,,,,,,waqt ka fer apne mein samet leta hai ,,,,,,hamare jajwaaton ko khyaaloN ko khwaaboN ko
Title: Re: बस यूँ ही
Post by: Sagar on July 28, 2014, 06:42:48 PM
Zoya ji aap ki kalam se nilki har creation mujhe behad passand aati rahi hai.. ye bhi ek aisi hi creation hai jo kisi bhi padhne waale ke chehre pe muskaan laa de... bahot khoobsoorat andaaz, ek  nayaa-pan  liye huye, dekhne ko milta hai aap ke likhe me... sabse badi baat ke ye original hai... aise hi likhte rahiye aur share karte rahiye.. mujhe intezaar rehta hai aur padhne kaa...
Title: Re: बस यूँ ही
Post by: Venus Sandal on July 30, 2014, 05:21:02 AM
Rashmi di...thanx....di
Title: Re: बस यूँ ही
Post by: Venus Sandal on July 30, 2014, 05:24:54 AM
Zoya ji aap ki kalam se nilki har creation mujhe behad passand aati rahi hai.. ye bhi ek aisi hi creation hai jo kisi bhi padhne waale ke chehre pe muskaan laa de... bahot khoobsoorat andaaz, ek  nayaa-pan  liye huye, dekhne ko milta hai aap ke likhe me... sabse badi baat ke ye original hai... aise hi likhte rahiye aur share karte rahiye.. mujhe intezaar rehta hai aur padhne kaa...

Sagar ji
Bahuttttttt bahut dhanywaad..yr words means a lot

:)

Hmmmm
Thanx..is liye ki apne ye kaha ki mera likha..muskaan lata he....shaayaf kuch puny mile mujhe..:)

Likhna nhi aata ..bas likh deti hun..aur haan..wo zaari rahega :)