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Other language poetry => Kaavyanjali => Topic started by: Venus Sandal on July 02, 2014, 11:20:42 AM

Title: दियासिलाई - ik logic
Post by: Venus Sandal on July 02, 2014, 11:20:42 AM

कितना चिढाया करते थे तुम मुझे
अक्सर माचिस को "दियासिलाई" कह कर
जब मैं कहती के
" अरे बाबा ..दियासिलाई नही..दियासलाई "
तो कहते....".इक नम्बर की बुधु हो "
"माचिस को दियासिलाई कहते हैं "
और जानती हो क्यूँ ??
मैं माथे पर सौ बट डाल के पूछती "क्यूँ?"
"अरे बुधु ....क्यूंकि वो दिए को सिल देती है !"
फिर जोर जोर से हाथ से चिढ़ा के हंसते
और फिर जब मैं भागती पीछे तो गाते
""चूहा दौड़ बिल्ली आई ""
...कितना चिढाते थे तुम मुझे.......
जब थक के गुस्से में मुहं फुला के बैठ जाती
पास आके कहते "दिया जलने के लिए बना है
जब तक माचिस न लगे बुझा रहता है
जैसे सुई इक फटे कपडे को सिल के
उसे अपने काम के लिए तैयार करती है
वैसे ही ये माचिस भी दिये से लग के
उसे अपने काम के लायक बना देती है
सो...हुई न ......दिया सिलाई ...........
मुझे कभी तुम्हारा ये "लोजिक" समझ में नही आया
कभी भी नही....

आता भी कैसे ??

कोई "लोजिक" था ही नही !

पर आज भी जब कभी "दियासलाई" सुलगाई है
हर सुबह मंदिर दिया जलाते
कभी मोमबत्ती सुलगाते
या यूहीं कहीं दिख जाए गर माचिस कहीं
इक मुस्कान खुद ब खुद फूट पड़ती है
"" दियासीलाई ...ह्म्म्म.....बुधू .......""

शायद ...यही लोजिक था तुम्हारा

इक बहाना बना के जेहन में रख देना ...
किसी ना किसी तरहा याद में रह के
मुझके मुस्कराहट देते रहने का

.........................शायद ...यही लोजिक था तुम्हारा !

"" दियासीलाई ...ह्म्म्म.....बुधू .......""
Title: Re: दियासिलाई - ik logic
Post by: Rashmi on July 02, 2014, 11:30:51 AM
Bahut khoob
Title: Re: दियासिलाई - ik logic
Post by: Sagar on July 02, 2014, 12:44:11 PM
sahi hai .. khoobsoorat khayaal .. meetha andaaz..
Title: Re: दियासिलाई - ik logic
Post by: Venus Sandal on July 30, 2014, 05:18:10 AM
sahi hai .. khoobsoorat khayaal .. meetha andaaz..
[/quote

Shukriyaaa sagar ji..
Title: Re: दियासिलाई - ik logic
Post by: Venus Sandal on July 30, 2014, 05:18:45 AM
Thanx rashmi di